मौर्यकालीन महत्वपूर्ण स्तम्भ और इनकी विशेषता-अशोक स्तंभ

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मौर्याकाल से जुड़े बहुत से मौर्यकालीन महत्वपूर्ण स्तम्भ मिले है जिनके बारे में जानना  जरुरी है, क्योंकि यह  जानकारी आपको किसी परीक्षा में बहुत उपयोगी सिद्ध होगी। मौर्या साम्राज्य के महान शासक सम्राट अशोक को दुनिया के सबसे महान  शासको में भी गिना जाता है ।

इन्ही के द्वारा सर्वपर्थम शिलाओं पर शिलालेख और स्तम्भों पर स्तम्भ लेख प्रचलन में आया। इनके काल से जुडी हुई बहुत सी जानकारिया हमें इन्ही स्तम्भ लेखो और शिलालेखों से प्राप्त होती है जिस पर अपने प्रजा के लिए अनेक निर्देश भी खुदे हुए है। जिसको सम्राट अशोक ने अपने जनता को सन्देश देने के लिए खुदवाया था।

मौर्यकालीन महत्वपूर्ण स्तम्भ और इनकी विशेषता
मौर्यकालीन महत्वपूर्ण स्तम्भ और इनकी विशेषता

मौर्यकालीन महत्वपूर्ण स्तम्भ और इनकी विशेषता:-

1. लौरिया नंदनगढ़ का स्तम्भ :- यह अब तक प्राप्त सभी स्तम्भों में सर्वाधिक सूंदर है।  इसके शीर्ष पर सिंह की प्रतिमा है और आसान के चारो तरफ हंस की प्रतिमा उत्कीर्ण है।
2. रामपुरवा के स्तम्भ:- लौरिया नन्दनगढ़ के समीप रामपूवा में भी अशोक के शिला स्तम्भ , पशु प्रतिमा और स्तम्भ से संयुक्त शीर्ष भाग उपलब्ध हुए।  अशोक के समय निर्मित स्तम्भों पर धर्म की सिक्षाए उत्कीर्ण की गयी है।
3. दिल्ली का टोपरा स्तम्भ :- यह फिरोजशाह के लाट के नाम से प्रशिद्ध है।  पहले यह स्तम्भ दिल्ली से 90 किलोमीटर दूर अम्बाला जिले में यमुना के किनारे टोपरा जिले में था।  फिरोजशाह तुगलक द्वारा इसे दिल्ली लाया गया। अब यह दिल्ली दरवाजे पर फिरोजशाह कोटला के नाम से प्रशिद्ध है। माना जाता है की फिरोजशाह ने इस स्तम्भ पर लिखे सब्दो को समझने की कोशिस की थी लेकिन इसे कोई पढ़ नहीं पाया था।
4. दिल्ली में मेरठ स्तम्भ :- इसे भी फिरोजशाह तुगलक द्वारा मेरठ से दिल्ली लाया गया था। 1713-1719 ई. में बादशाह फरुखसियर के तोपखाने में आग लग जाने के कारण यह स्तम्भ गिरकर ध्वस्त हो गया। किन्तु बाद में इसी ध्वस्त स्तम्भ को दुबारा मरमत करके ठीक किया गया था।………Join Telegram 
5. लौरिया अरराज स्तंभ :- बिहार के चम्पारण जिले में रधिया ग्राम से 2.5 मिल दूर दक्षिण पूर्व में अरराज महादेव का मंदिर है।  उसी के निकट यह लौरिया अरराज स्तम्भ खड़ा है इस पर अशोक के लेख उत्कीर्ण है।
6. इलाहबाद स्तम्भ :- इस पर सम्राट अशोक के दो लेख उत्कीर्ण है। इस स्तम्भ पर गुप्त वंस के शासक समुद्रगुप्त के प्राशाहस्ती के भी लेख खुदे हुए है।  समुद्रगुप्त को ही भारत का नेपोलियन भी कहा जाता है।
7. रूममीदेई के स्तम्भ :- नेपाल के रउम्मीदेई  नामक स्थान पर अशोक का एक प्राचीन स्तम्भ मिला है और इस पर लिखा है ,”यहां भगवान् बुद्ध का जन्म हुआ था। ” इस प्रकार भगवान् बुद्ध के जन्म स्थान के निर्णय में यह अभिलेख महत्वपूर्ण स्थान रखता है। रउम्मीदेई स्तम्भ के उत्तर-पश्चिम में 13 मिल दूर निगलीवा झील के समीप निग्लीवा ग्राम में यह स्तम्भ खड़ा है।  इस पर लिखे उत्कीर्ण में अशोक द्वारा कनकमुनि बुद्ध के स्तूप की मरम्मत करने का संकेत मिलता है।
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