वैज्ञानिकों ने खोज निकाला सूर्य की तरह नाभिकीय संलयन से ऊर्जा बनाने का तरीका

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वैज्ञानिकों ने सूर्य की तरह से ऊर्जा बनाने का तरीका खोजा:-

दुनिया में पहली बार UK वैज्ञानिकों ने सूर्य नाभिकीय संलयन से ऊर्जा बनाने का तरीका ढूंढ निकला है। अभी तक आपने हवा, पानी, कोयला, धुप और यूरेनियम जैसे तत्वों से ऊर्जा बनाने के बारे में सुना होगा। लेकिन सूर्य की तरह संलयन से ऊर्जा बनाने का तरीका लगभग असंभव था, अब इसको लेकर वैज्ञानिको ने दावा किया है, कि उन्होंने नाभिकीय संलयन से ऊर्जा बनाया है।

वैज्ञानिकों ने खोज निकाला सूर्य की तरह नाभिकीय संलयन से ऊर्जा बनाने का तरीका
वैज्ञानिकों ने खोज निकाला सूर्य की तरह नाभिकीय संलयन से ऊर्जा बनाने का तरीका,मानव इतिहास में पहली बार

इस प्रकार के तरीके से ऊर्जा बनाने से यह ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में मिल का पत्थर साबित होगा और यह बिलकुल नया तरीका है, क्योंकि अभी तक इस तरीके से ऊर्जा सूर्य में ही पैदा होती थी। लेकिन इस शोध से अब पृथ्वी पर भी ऊर्जा उत्पन्न किया जा सकेगा। क्योंकि, आपको भी पता है की सूर्य में Nuclear Fusion(परमाणु संलयन) की क्रिया द्वारा ऊर्जा उत्पन्न होता है।

मानव इतिहास में पहली बार नाभिकीय संलयन से ऊर्जा उत्पादन:-

अभी हाल ही में यूनाइटेड किंगडम(UK) के वैज्ञानिकों ने कहा कि उन्होंने परमाणु संलयन ऊर्जा के उत्पादन में या सूर्य में ऊर्जा के उत्पादन के तरीके की नकल करने में एक नया मील का पत्थर हासिल किया है। परमाणु संलयन द्वारा ऊर्जा मानव जाति की लंबे समय से चली आ रही खोजों में से एक है क्योंकि यह कम कार्बन होने का वादा करती है, जो अब परमाणु ऊर्जा का उत्पादन करने की तुलना में सुरक्षित है और एक दक्षता के साथ जो तकनीकी रूप से 100% से अधिक हो सकती है।

United Kingdom परमाणु ऊर्जा प्राधिकरण ने सोमवार को एक बयान में कहा, मध्य इंग्लैंड में ऑक्सफोर्ड के पास संयुक्त यूरोपीय टोरस (जेईटी) सुविधा में एक टीम ने दिसंबर में एक प्रयोग के दौरान 59 मेगाजूल निरंतर ऊर्जा उत्पन्न की, जो 1997 के रिकॉर्ड को दोगुना से अधिक है। एक किलो संलयन ईंधन में एक किलो कोयला, तेल या गैस की तुलना में लगभग 10 मिलियन गुना अधिक ऊर्जा होती है।

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वैज्ञानिकों ने नाभिकीय संलयन से कैसे ऊर्जा का उत्पादन किया:-

आपके मन में यह सवाल जरूर होगा कि इस प्रकार के ऊर्जा का उत्पादन वैज्ञानिकों ने कैसे किया। तो हम यह भी जानेंगे, इस ऊर्जा का उत्पादन एक टोकामक नामक मशीन में किया गया था, जो एक डोनट के आकार का उपकरण है, और जेईटी साइट दुनिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा परिचालन है।

ड्यूटेरियम और ट्रिटियम, जो हाइड्रोजन के समस्थानिक हैं, जिनको प्लाज्मा बनाने के लिए सूर्य के केंद्र की तुलना में 10 गुना अधिक गर्म तापमान पर गर्म किया जाता है। यह सुपरकंडक्टर इलेक्ट्रोमैग्नेट्स का उपयोग करके आयोजित किया जाता है क्योंकि यह चारों ओर घूमता है, फ़्यूज़ करता है और गर्मी के रूप में जबरदस्त ऊर्जा छोड़ता है। इस प्रकार से नाभिकीय संलयन से ऊर्जा का उत्पादन होता है।

नाभिकीय संलयन से ऊर्जा उत्पादन वैज्ञानिकों के लिए बड़ी उपलब्धि:-

इन महत्वपूर्ण प्रयोगों का रिकॉर्ड और वैज्ञानिक डेटा ITER के लिए एक बड़ा बढ़ावा है, जो JET का बड़ा और अधिक उन्नत संस्करण है। ITER फ़्यूज़न ऊर्जा की वैज्ञानिक और तकनीकी व्यवहार्यता को और प्रदर्शित करने के लिए फ्रांस के दक्षिण में स्थित सात सदस्यों – चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा समर्थित एक संलयन अनुसंधान मेगा-प्रोजेक्ट है।

यूके(यूनाइटेड किंगडम) परमाणु ऊर्जा प्राधिकरण के सीईओ इयान चैपमैन ने एक बयान में कहा: “इन ऐतिहासिक परिणामों ने हमें उन सभी की सबसे बड़ी वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग चुनौतियों में से एक पर विजय प्राप्त करने के करीब एक बड़ा कदम उठाया है। यह पूरे यूरोप के हमारे भागीदारों के साथ 20 से अधिक वर्षों के अनुसंधान और प्रयोगों का पुरस्कार है… यह स्पष्ट है कि हमें जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण परिवर्तन करने होंगे।

नाभिकीय संलयन इतनी क्षमता प्रदान करता है। हम ज्ञान का निर्माण कर रहे हैं और कम कार्बन प्रदान करने के लिए आवश्यक नई तकनीक विकसित कर रहे हैं, बेसलोड ऊर्जा का टिकाऊ स्रोत जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए ग्रह की रक्षा करने में मदद करता है। हमारी दुनिया को फ्यूजन एनर्जी की जरूरत है।”

पिछले अगस्त में, अमेरिका में लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने हाइड्रोजन के मटर के आकार की गोली पर 192 विशाल लेज़रों पर ध्यान केंद्रित करके एक टोकोमाक के लिए वैकल्पिक दृष्टिकोण में संलयन से एक सेकंड के 100 ट्रिलियनवें हिस्से में 1.3 मेगाजूल उत्पन्न करने की सूचना दी।

Conclusion(निष्कर्ष):-

वाकई इस प्रकार नाभिकीय संलयन से ऊर्जा उत्पन्न करना एक अद्भुत बात है, क्योंकि जिस प्रकार से पृथ्वी पर ऊर्जा संसाधनों का खपत बढ़ रहा है। ऐसे में हमे ऊर्जा उत्पादन के लिए नए तरीके की जरुरत है। जिस प्रकार से अभी तक पृथ्वी पर ऊर्जा पैदा किया जाता था, उससे पर्यावरण को काफी खतरा पहुँचता था। जैसे – बांध बनाने में काफी पेड़ो और एरिया को खाली करना पड़ता था। लेकिन अब इस बिधि से ऊर्जा उत्पन्न करने में संसाधनों और पर्यावरण का भी संरक्षण होगा, क्योंकि नाभिकीय संलयन से ऊर्जा बनाने में कार्बोन का उत्सर्जन नहीं होता है।

Source:- The Hindu

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