आधुनिक भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस और उनके योगदान

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जगदीश चंद्र बोस (Jagdish Chandra Bose)
जगदीश चंद्र बोस (Jagdish Chandra Bose)
 
 

जगदीश चंद्र बोस (Jagdish Chandra Bose):-

 
आधुनिक भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस जन्म 1858 में बंगाल प्रेसीडेंसी  के मुंशीगंज(अब बांग्लादेश में है ) में ब्रिटिश शासन के दौरान हुआ था। 
बोस ने सेंट जेवियर्स कॉलेज, कलकत्ता(कोलकाता) से स्नातक किया वह चिकित्सा का अध्ययन करने के लिए इंग्लैंड के लंदन विश्वविद्यालय गए, लेकिन स्वास्थ्य समस्याओं के कारण चिकित्सा में अध्ययन नहीं कर सके। इसके बजाय, उन्होंने कैम्ब्रिज में नोबेल पुरस्कार विजेता लॉर्ड रेले के साथ अपना शोध किया और भारत लौट आए।
वे इंग्लैंड में आयोजित होने वाले सिविल सर्विस परीक्षा देना चाहते थे परन्तु किसी कारणवश उनका मन  बदल गया और उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से प्राकृतिक विज्ञानं से पढाई पूरी की।   
उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रेसीडेंसी कॉलेज में भौतिकी के प्रोफेसर के रूप में प्रवेश लिया। वहां, नस्लीय भेदभाव और धन और उपकरणों की कमी के बावजूद, बोस ने अपने वैज्ञानिक अनुसंधान को जारी रखा।
उन्होंने रिमोट वायरलेस सिग्नलिंग के अपने शोध में उल्लेखनीय प्रगति की और रेडियो सिग्नल का पता लगाने के लिए सेमीकंडक्टर जंक्शनों का उपयोग करने वाले पहले व्यक्ति थे।
हालांकि, इस आविष्कार से व्यावसायिक लाभ हासिल करने की कोशिश करने के बजाय, बोस ने अपने आविष्कारों को सार्वजनिक किया ताकि दूसरों को अपने शोध को और विकसित करने की अनुमति मिल सके। 

विज्ञानं के क्षेत्र में जगदीश चंद्र बोस योगदान :-

जगदीश चंद्र बोस को भारत का प्रथम आधुनिक वैज्ञानिक माना जाता है। इन्होने भौतिकी और जिव विज्ञानं में महत्वपूर्ण कार्य किया। जनवरी,1898 में यह सिद्ध हुआ की मार्कोनी का बेतार अभिग्राही अर्थात वायरलेस रिसीवर जगदीश  चंद्र बोस द्वारा बनाया गया था।

मार्कोनी ने इसी का ही एक संशोधित यन्त्र प्रयोग किया था जो मर्करी ऑटो कोहलर था,जिससे पहेली बार अटलांटिक महासागर के पार बेतार संकेत 1901 में प्राप्त हो सका था। जगदीश चंद्र बोस एक जीवविज्ञानी , भौतिक विज्ञानी, वनस्पतिशास्त्री और विज्ञान कथा के प्रारंभिक लेखक थे। …...Join Telegram

उन्होंने रेडियो और माइक्रोवेव ऑप्टिक्स की जांच का बीड़ा उठाया, उन्होंने पादप विज्ञान में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया और भारतीय उपमहाद्वीप में प्रायोगिक विज्ञान की नींव रखी। IEEE ने उन्हें रेडियो विज्ञान के पिताओं में से एक का नाम दिया। बोस को बंगाली विज्ञान कथाओं का जनक माना जाता है।

इसके अलावा उन्होंने क्रेस्कोग्राफ का भी आविष्कार किया, जो पौधों की वृद्धि को मापने के लिए एक उपकरण है। उनके सम्मान में चंद्रमा पर एक क्रेटर का नाम रखा गया है। उन्होंने बोस इंस्टीट्यूट(बोस विज्ञान मंदिर) की स्थापना 1917 में  की, जो भारत का एक प्रमुख शोध संस्थान है। 

 1917 में स्थापित, यह संस्थान एशिया का पहला अंतःविषय अनुसंधान केंद्र था। उन्होंने अपनी स्थापना से लेकर अपनी मृत्यु(1937) तक बोस संस्थान के निदेशक के रूप में कार्य किया। इनको ‘रेडियो साइंस का पिता’ कहा जाता है। जगदीश चंद्र बोसे भारतीय उपमहाद्वीप में आधुनिक विज्ञान के संस्थापक है। 

जगदीश चंद्र बोसे के प्रयोग :-

1901 में लंदन की रॉयल सोसाइटी में बोस द्वारा किए गए एक प्रसिद्ध प्रयोग ने प्रदर्शित किया कि मनुष्यों की तरह, पौधों में भी भावनाएँ होती हैं। उन्होंने ब्रोमाइड के घोल वाले बर्तन में एक पौधा रखा, जो जहरीला होता है। अपने उपकरण का उपयोग करके, उन्होंने एक स्क्रीन पर दिखाया कि पौधे ने जहर का जवाब कैसे दिया।

कोई भी स्क्रीन पर तेजी से आगे-पीछे की हरकत देख सकता था जो अंत में मर गया। ऐसा ही कुछ होता अगर किसी जानवर को जहर में डाल दिया जाता। जहर के कारण पौधा मर गया। उन्होंने अपने उपकरण को क्रेस्कोग्राफ कहा और आगे के प्रयोग किए। दुनिया भर के अधिकांश वैज्ञानिकों ने उनके निष्कर्षों की प्रशंसा की।

उन्हें दो पुस्तकों को लिखने के लिए जाना जाता है: रिस्पांस इन द लिविंग एंड नॉन-लिविंग और द नर्वस मैकेनिज्म ऑफ प्लांट्स। 1895 में, उन्होंने डबल रिफ्लेक्टिंग क्रिस्टल्स द्वारा ऑन द पोलराइज़ेशन ऑफ़ इलेक्ट्रिक रेज़ नामक एक शोध पत्र प्रस्तुत किया, जिसे 1896  के दौरान द रॉयल सोसाइटी ऑफ़ लंदन द्वारा प्रकाशित किया गया था।

अपने अनुभवों और कल्पनाओं के आधार पर, उन्होंने निरुदेशेर कहिनी नामक एक विज्ञान कथा लिखी, जिसे बाद में प्रकाशित किया गया।

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